गाँव के खेत में पुष्पा भाभी की चुदाई – 2

खेती के कुछ जरुरी काम से अभी दिसंबर माह में गाँव जाना हुआ भयंकर ठंडी पड़ रही 14 दिसंबर को दोपहर में 3 बजे अकेले ही गाँव पहुंच गया खाना खाने के बाद छत में चढ़ गया और पुष्पा के घर की तरफ देखा तो पुष्पा दिखाई नहीं दी तो मैं पुष्पा को तलासने लगा पर नहीं दिखी तो छत नीचे आ गया पुष्पा के घर में सामने गया तो मंगलू की माँ मिली उससे हाल चाल पूछने लगा तो पता चला की मंगलू और पुष्पा दोनो गंगा स्नान के लिए गए हुए है आज साम वाली रेल से आ जायेगे मन ही मन खुस हो गया की चलो कल से पुष्पा मिल जाएगी चोदने लिए ! इसी आशा के साथ रात निकाल दिया 9 बजे सुबह उठा तब भी खूब कोहरा गिर रहा था फिर भी पुष्पा का दीदार करने के लिए बाहर साल ओढ़कर घूमने लगा पर पुष्पा दिखाई नहीं दी तब 10 बजे छत पर चढ़ गया तब देखा की पुष्पा कुछ काम कर रही थी पर उसने मुझे नहीं देखा तो एक छोटा सा पत्थर पुष्पा के पास उछाल दिया तो पुष्पा इधर-उधर देखने लगी तब मैंने एक छोटा सा आँवला पुष्पा को निशाना बना कर फेका जो पुष्पा के टीक सामने गिरा तो पुष्पा मेरे घर की छत की तरफ पलट कर देखि और खुसी उछल पडी और हाथ से इसारा किया की मैं आर ही हु ! तब मैं छत से नीचे उतरा और गेट से कुछ दूर खड़ा हो गया तो देखा की पुष्पा हाथ में लोटा लिए हुए तुवर के खेत की तरफ जा रही थी , मैं भी दुसरी तरफ से जल्दी जल्दी घूमकर तुवर के खेत में घुस गया

जिधर पुष्पा थी और जल्दी से पुष्पा के पास पहुंच गया और जाते ही पुष्पा को सीने से लगा लिया और चूमने लगा करीब 10 मिनट तक चूमने और चूचियोि
को दबाने के बाद पुष्पा बोली ”अब बस भी करिये छोटे ठाकुर” तब मैं पुष्पा पेटीकोट का नाड़ा खोलने लगा तो फिर बोली ” अरे रुकिए अभी मुझे जल्दी जाना है,रात में कर लेंगे” तब मैंने कहा ” रात में कैसे करोगी” तो पूषा ने बताया की ओ (मंगलू-पुष्पा) नहीं है घर में गंगा स्नान से नहीं आये वही रुक गए ”सनीचर” तक आयेगे तब तक आप रोज आ जाना घर में तब मैंने कहा की ” ओ बुढ़िया तुम्हारी लड़की तो है न ” तब बोली ”लड़की तो मामा के पास है पढ़ाई कर रही शहर में, और बुढ़िया मेरे कमरे से दूर की कोठरी में सोती है ” तब मैंने कहा ” टीक है पर कितने बजे आउगा” तो बोली ” मैं मिस काल दूंगी 10 बजे तक गाँव में सुनसान हो जाता है ” फिर बोली ”अब जाइए यहाँ से कोई देख न ले ” और मुझसे अलग हो गई और खेत से बाहर आ गई और मैं भी बाहर आ गया और घर चला आया व् रात का इन्तजार करने लगा !बड़ी मुस्किल से दिन कटा रात आई और 10 भी बज गए पर पुष्पा की मिस काल नहीं आई तो मैंने रात के साढ़े 10 बजे फोन किया तो पुष्पा-फुसफुसाते हुए धीरे से बोली ” ये बुढ़िया अभी तक खाँस रही है लगता है जग रही है” तब मैंने पुष्पा को बोला ” मेरे घर आ जाओ” तो पुष्पा बोली ”आपके कुत्ते नोच डालेंगे और गेट में ताला भी लगा है” तब मैंने कहा ”ओ सब चिंता छोड़ दो मैं मैनेज कर लूंगा” तो बोली ” ठीक है मैं आती हु आप गेट खोल दीजिये” तब मैं गया और मेन गेट की चाबी लिया और ताला खोलकर पुष्पा पुआल का बिस्तर जमीन में लगा कर रखा था

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वापस आ गया तब भी पुष्पा नहीं आई तब मैंने फिर से फोन किया 15 मिनट बाद तो बोली ”आप आ जाओ बुढ़िया सो गई है” तब मैंने कहा ”ओके” और दबे पाँव पुष्पा के घर पहुंच गया पर इतनी ज्यादा ठंडी थी की ज़रा से देर में ठण्ड में काँपने लगा ! पुष्पा घर दरवाजे खड़ी मिली जैसे ही अंदर हुआ दरवाजा लगा लिया और मेरा हाथ पकड़ कर अपने कमरे में ले गई !पुष्पा के कमरे में पहली बार मैं घुसा हु , अभी तक जितने बार चोदा खेत में ही चोदा पहली बार पुष्पा को उसके घर में चोदने जा रहा हु ! पुष्पा के कच्चे मकान में छोटा सा कमरा है ! भयंकर ठंडी से बचने के लिए धान के पुआल को जमीन पर बिछा रखा था उसी के ऊपर एक पतला से गद्दा किन्तु गद्दे केऊपर चादर नई नई डली हुई थी तकिया में खोल था रजाई तो बिना कवर के थी जिसके सिरहाने पर ज्यादा ही मैली थी तेल लगे थे ! कमरे के अंदर घुसते ही पुष्पा ने कमरे का दरवाजा लगा लिया और बल्व में ऊपर एक कपड़ा फेक दिया मोटा सा जिससे कमरे में उजाला कम हो गया ! तब तक मैं खड़ा ही रहा तो पुष्पा हाथ पकड़ कर बिठाई और लिपट गई मेरे से मैं भी पुष्पा को अपने मजबूत बाहों में भर कर चूमने लगा मेरी सारी ठंडी अचानक गायब हो गई ! पुष्पा को
बाहो में भरते हुए पुष्पा का ब्लाउज और ब्रा का हुक खोल दिया और चुचियो को दबाने लगा और होठो को चूसने लगा पुष्पा भी मेरे होठो को ऐसे चूसने लगी जैसे वर्षो से प्यासी हो, ऐसी लिपटी जैसे नागिन नाग के जिस्म से लिपट जाती है ! क्योकि पुष्पा से एक साल के बाद मिल रहा हु,पुष्पा चुदाई के लिए तड़प रही है क्योकि मंगलू में ओ दम नहीं की पुष्पा की जिस्मानी माग की पूर्ति कर सके ! धीरे से पुष्पा को लेकर लेकर लेट गया और रजाई से ढक लिया पुष्पा को और चूची दबाने लगा और एक हाथ को जांघो में घुमाने लगा इधर पुष्पा मेरे बनियान ,स्वेटर के नीचे हाथ घुसा कर सीने पर हाथ घुमाने लगी सीने के
बालो से खेलने लगी मैंने धीरे से पुष्पा के जांघो से हाथ घुमाते हुए बुर के पास ले गया और बुर को सहलाते सहलाते धीरे से बुर के छेद के मुहाने में बीच की बड़ी वाली ऊँगली से अंदर की सतह पर घुमाने लगा तो पुष्पा अपनी आँखों को बंद कर लिया और दाँतों को आपस में घिसते हुए होठो को चबाने लगी और मेरे सीने से हाथ हटकर मेरे लण्ड को पकड़ लिया और गोल गोल अनडुओ को खिलाने लगी मैं समझ गया अब पुष्पा चुदाने के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुकी है मैंने पुष्पा की चूची की निप्पल को छुआ तो ओ एकदम से अंगूर के माफिक टाइट और रसीली हो चुकी थी मैंने बिना देरी किये अंगूर को जीभ से चखने लगा और टाइट निप्पल पर जीभ को घुमाने लगा और एक हाथ से पुष्पा के पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और साडी सहित पेटीकोट को खिसकाने लगा तो पुष्पा अपने चिकने चूतडो को उठा लिया तो मैंने पुष्पा को नंगी कर दिया और अपने भी चढ्ढी बनियान, लोवर उतार दिया और पुष्पा का ब्लाउज ब्रा भी पुष्पा के तपते हुए सेक्सी वदन से अलग कर दिया और उठकर रजाई के नीचे पुष्पा की बुर को चाटने लगा मुस्किल से एक मिनट ही बुर चाटने के बाद ही पुष्पा भाभी मेरे मुह पर हाथ रखने लगी अपनी बुर को हाथ दबाने लगी हाथ को सर को पकड़ कर अपनी तरफ खीचने लगी तब मैं पुष्पा के ऊपर चढ़ गया और लण्ड को एक ही झटके में बुर में डाल दिया , जैसे ही लण्ड घुसा पुष्पा ने अपने दोनों हाथो के मेरे पीठ पर रखा और कस कर पकड़ लिया और मेरे होठो को,गालों को ,जीभ को लाली पाप की तरह चूसने लगी तो मैंने लण्ड के धीरे धीरे झटके मारने सुरु कर दिया तो पुष्पा ने अपने दोनों हाथो को मेरे नितम्बो पर लगाकर आगे पीछे करने में सहयोग करने लगी और साथ साथ मुझे चूमते भी जाती मैं भी पुष्पा को चूमता जाता और झटके पर झटके मारता जाता पुष्पा के मुह से धीरे धीरे उ उ उ उ उ उ अहहः आअह्ह आअह्ह आअह्ह उउउस्स्स् म्द्पोजुक्न्मोफ़्वेओइझ्र्व कुछ भी अजीब टाइप निकालने लगी मैं समझ गया पुष्पा अंतिम दौर में पहुंच चुकी है और पुष्पा मेरे नितम्बो को जल्दी जल्दी आगे पीछे करने लगी अपने हाथो से और मैं भी रजाई के अंदर पूरी ताकत से पुष्पा की बुर में झटके मारता रहा और फिर ये क्या पुष्पा ने मेरे नितम्बो से अपना हाथ हटा कर इतनी जोर से कस कर पकड़ा की मेरे नितम्ब का आगे पीछे करने में रूकावट आने;लगी तब मैं समझ गया की पुष्पा स्खलित हो चुकी है पर मैं स्खलन से काफी दूर हु अभी ,वियाग्रा और शिलाजीत के दोहरे प्रभाव से मेरी स्तम्भक (ज्यादा देर तक चोदने की क्षमता में बढ़ोत्तरी हुई है) क्षमता बहुत ज्यादा हो गई है ! पुष्पा मुझे चिपकी हुई थी और मेरा टाइट लण्ड पुष्पा की चूत में अभी भी घुसा हुआ था पुष्पा बोली ” का हुआ निपटे नहीं का” तब मैंने कहा ”कहा निपटा धोखा दे दिया तुमने” तो मेरे गालों पर चिमटी लेते हुए बोली ”क्यों ठकुराइन साहब भी धोखा देती क्या ” तब मैं पुष्पा के गोरे गोरे लाल लाल गालो को दांत से हलके से काट लिया और बोला ”अब इस समय तुम्ही ठकुराईन हो” और इस तरह से बातें करते करते ध्यान बट गया और लण्ड को बाहर निकाल लिया और पुष्पा से बातें करने लगा हँसी ठिठोली करते करते 30 मिनट से ज्यादा हो गए तो पुष्पा की चूची की निप्पल फिर से टाइट पड़ गई तो मेरे लण्ड में फिर से तूफ़ान आ गया ! पर इस बार पुष्पा ज्यादा समय लेगी ये सोच कर लण्ड की सुपाड़े को नंगा किये बिना कंडोम चढ़ा लिया और फिर सांड की माफिक चढ़ गया पुष्पा के ऊपर और फिर दे दना दन दे दना दन सुरु हो गया और लगातार एक एक ही पोजीसन में 10 मिनट तक पुष्पा की चुदाई किया और रात भर पुष्पा के पास ही लेटा रहा और सुबह 5 बजे उठकर अपने घर आ गया ! इस तरह लगातार रोज रात में पुष्पा के घर घुस जाता और तबियत से चुदाई करता ! पुष्पा बहुत मजा देती चुदाने में !

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