जूस वाली को अपना जूस पिलाया

मेरा नाम पंडित है, मेरी उम्र 28 साल है, बदन गठीला, लंबा चौड़ा, लण्ड का साइज-6 इंच लंबा, 5 इंच मोटा, छाती में काले लंबे लंबे बाल जो पेट तक फैलें हुए हैं..
कुल मिलाकर मेरे शरीर की बनावट ऐसी है कि किसी भी औरत का मुझ से चुदने का मन हो जाये. मैं जब अपने ऑफिस के लिए निकलता हूँ तो दफ्तर जाते वक्त एक जूस की ठेली मिलती है, जहाँ एक गरीब सा 55-60 साल की उम्र का आदमी, शारिरिक रूप से कमजोर, गाल पिचके हुए, हाथ कांपते हुए जैसे किसी रोग से पीड़ित हो मौसमी का जूस बेचता है तो मैं कभी कभी उसकी ठेली से मौसमी का जूस पी लेता हूँ..
उसका हाथ उसकी बीबी बंटाती है, जिसकी उम्र लगभग 48-50 साल होगी. दिखने में उसकी बीबी भी कमजोर है, गाल पिचके हुए हैं, हाथ पतले पतले, गले की हड्डियां साफ दिखाई दे रही हैं, आँखें अंदर धसी हुयी हैं, बूब्स लटके हुए जैसे उनका सारा रस उसकी जवानी में कोई पी गया हो, रंग काला, कूल्हे भी छोटे से, पूरी कुपोषण की शिकार लग रही है..
ऐसा लग रहा है जैसे किसी गंभीर बिमारी से ग्रस्त हो, लेकिन उसकी ये हालत गरीबी के कारण थी. ऐसी औरत किसी को भी पसंद न आये लेकिन मैं बहुत ही हवसी किस्म का हूँ, मुझे लगा एक बार इसका अनुभव लेना चाहिए.
एक दिन मैं उसी की मौसमी की ठेली में जूस पीने रुका, उस दिन उसका पति नहीं था, वो ही जूस निकाल रही थी, उस दिन उसने एक हरी रंग की साड़ी पहनी हुयी थी जिसमे उसके साथ उसने हरे रंग ब्लाउज पहना था..
उसकी सफेद ब्रा ब्लाउज के बाहर से नजर आ रही थी, पतले पतले हाथ में उसने कुछ चूड़ियाँ पहनी हुई थी जो पुरानी थी, मेने उसके पैर देखे वो काले गंदे फटे हुए थे जिसमे उसने पुरानी पजेब पहन रखी थी..
ढीला सा बदन, ढीले से स्तन, ढीली साड़ी पहने हुए वो मेरे लिए मौसमी का जूस निकाल रही थी, उसमे से कोई आकर्षण नही झलक रहा था लेकिन फिर भी पता नहीं क्यों मेरा लण्ड उसे देखकर खड़ा था और मेने प्रतिज्ञा ली हुयी थी की इसे पटाकर जरूर चोदूंगा, उसने मुझे मौसमी का जूस दिया.
मैं- आज अंकल नही है, कहीं गए हैं क्या?
मौसमी के जूस वाली- हाँ आज मजदूरी में गए हैं.
मैं- नाम क्या है तेरा?
मौसमी के जूस वाली- कांता, क्यूँ पूछ रहा है?
मैं- मन किया पूछने का, नाम नहीं पूछ सकता क्या?
कांता- तुझे क्या मतलब, तू जूस पी बस.
मैं- गुस्सा क्यों होती है आंटी. जूस बड़ा मस्त बनाया है तूने, अंकल तो बेकार बनाते हैं, तेरे हाथ से अच्छा निकला जूस.
कांता- ठीक है, 20 रु दे दे अब.
मैं- एक गिलास और पिला दे आंटी.
कांता- रुक जा इंतज़ार कर, जूस निकलना पड़ेगा.
मैं- ठीक है आंटी, मेरे पास टाइम ही टाइम है, तू आराम से निकाल. एक बात तो बता, रहती कहाँ है तू?
कांता- तुझ से मतलब, जहाँ भी रहती हूँ, तुझे क्या करना है जानकार?
मैं- पता होना चाहिए इतना मस्त जूस निकलने वाली का क्या पता है, कभी ठेली न लगी तो घर में जूस पीने आ जाऊंगा.
कांता- घर में नहीं निकालते हम, यहीं पीना है तो पी ले.
मैं- कोई बेटा या बेटी भी है तेरी?
कांता- ज्यादा सवाल मत पूछ, जूस पी और घर जा, एक बेटा है मेरा तेरे बराबर. आम बेचता है वो मंडी में. यहाँ से 2 किलोमीटर दूर नाला बस्ती में रहते हैं हम.
मैं- तेरी हालत ऐसी क्यूँ हो रखी है आंटी, बीमार सी लगती है तू.
कांता- बीमार नहीं हूँ, गरीबी ने ऐसा बना दिया है.
मैं- चल मैं 1 गिलास जूस के आज से 40 रु दूंगा तुझे रोज.
कांता- ऐसा क्यों रे, मेरा आदमी गुस्सा करेगा, वो बहुत खुद्दार आदमी है.
मैं- तेरे आदमी को थोड़े ही दूंगा, तुझे दूंगा, तू उसे बताइयो मत, चुपके से छिपा लियो.
कांता- ध्यान से देना लेकिन, उसे पता चलेगा तो मुझे पीटेगा वो. वैसे भी रोज दारु पीने के बाद रात में मुझे मारता है वो.
मैं- इतना हरामी है क्या, चल आंटी वादा रहा तुझ से, आज से वो नहीं पिटेगा तुझे.
कांता- वो कैसे?
मैं- मैं सबक सीखा दूंगा उसे.
कांता- ऐसा मत करना रे, उसे पता चल जायेगा. नाम क्या है तेरा बेटा?
मैं- मेरा नाम पंडित है आंटी. आंटी मैं अंकल को अपने तरीके से सबक सिखाऊंगा तू परेशान न हो.
कांता- ठीक है, लेकिन बेटा तू मेरे लिए ये सब क्यों कर रहा है?
मैं- मुझे तुझ पर दया आ गयी आंटी, मैं गरीबों की मदद करता हूँ, तभी तुझ से तेरे घर का पता पूछा ताकि कभी पैसे देने हो तो दे दूँ.
कांता- हाँ, नाला बस्ती में आ जाना पूछ लेना किसी से भी कि कांता का झोपडा कहाँ है कोई भी बता देगा.

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मैं- ठीक है आंटी, मैं चलता हूँ, तू ख्याल रख अपना और कुछ खा पी, बहुत कमजोर हो गयी है. कल आता हूँ.
कांता- ठीक है बेटा, कल पक्का आना.
(और मैं कांता को आँख मारकर वहां से चला जाता हूँ जिससे वो सकपका जाती है लेकिन एक मुस्कान भी देती है जो शर्म से भरी हुयी थी)
(रात के समय मैं नाला बस्ती के पास कांता के बूढ़े पति का इंतज़ार कर रहा था, अचानक लड़खड़ा कर वो विक्रम से उतरा, उसने दारु पी रखी थी, जैसे ही वो अपने घर की गली की ओर मुड़ा, मेने उसे पीटना शुरू कर दिया, उसको लात और घूसों से पीटता रहा, वो रोने लगा, माफ़ी मांगने लगा)
मौसमी के जूस वाला- माफ़ कर दे मुझे , मत मार, छोड़ दे मुझे, बस कर भाई.
मैं- तेरी माँ का भोसड़ा, भेन के लौड़े, कांता को मारता है रोज़ दारु पीकर, आज मर्द से पाला पड़ा तो माफी मांग रहा है, हिजड़े, भेनचोद, बोल मारेगा अब कांता को??
मौसमी के जूस वाला- आज से कभी हाथ नहीं लगाउँगा बेटा, माफ कर दे इस बूढ़े को, जाने दे घर बेटा, आज से कभी नहीं मारूँगा उसे.
मैं- और सुन बेवड़े, अगर उसे बताया की मेने तुझे मारा है तो कल फिर मार खायेगा भोसडीके. सुन लिया?
मौसमी के जूस वाला- हाँ सुन लिया बेटा. माफ़ कर दे अब.
मैं- निकल मादरचोद यहाँ से अब, बहिनचोद साला हरामी.
(और कांता का पति घर चला जाता है, अगले दिन जब मैं मौसमी के जूस की ठेली पर जाता हूँ तो कांता काफी खुश दिख रही थी, उसका पति भी उसी के साथ था)
मैं- अंकल एक गिलास जूस देना.
(मैं और कांता आँखों ही आँखों से इशारा कर रहे थे, मैंने चुपके से उसे आँख मार दी, और वो मुस्कुराने लगी, मेने उसे इशारे में कहा कि थोड़ा आगे की तरफ मिलना, वो समझ गयी)
(मौसमी का जूस पीने के बाद मेने बाइक स्टार्ट करी और आगे चला गया और कांता का इंतज़ार करने लगा, कांता आई उसने लाल रंग की साड़ी, लाल रंग का ब्लाउज पहना हुआ था, आज काली ब्रा पहनी थी जो उसके कन्धों पर दिख रही थी, होंठों में लिपस्टिक भी लगायी हुयी थी, मैं समझ गया की उसने ये सब श्रृंगार मेरे लिए किया है, वो मेरे पास आई)
कांता- जूस पी लेता हूँ, उसका हाथकिया बुड्ढे को, उसने मारा नहीं मुझे, और अभी क्या काम है?? बुड्ढे को बोलकर आई हूँ कि थोड़ी देर आती हूँ, जल्दी बता क्या काम है??
मैं- तुझे पैसे देने थे कुछ, और सुन आज घर कब जायेगी, और घर में अकेले कब रहेगी, बता?
कांता- क्यों क्या करना है घर में?
मैं- पैसे देने है तुझे.
कांता- अभी दे दे, घर में 5 बजे जाउंगी, बुड्ढा 9 बजे आता है.
मैं- अभी नहीं आंटी, घर में दूंगा तुझे, सुन पीछे बैठ, तुझे घुमा कर लाता हूँ.
कांता- अभी टाइम नहीं है, बुड्ढा इंतज़ार कर रहा है.
मैं- कुछ ना होता, अगर कुछ बोलेगा तो मैं समझा दूंगा उसे, तू बैठ पीछे.
(कांता बाइक में बैठ जाती है और मैं उसे घुमाता हूँ, मैं उसे उसकी मौसमी की ठेली के आगे से ले जाता हूँ, ताकि उसका पति उसे एक बार मेरे साथ देख ले, वो बहुत मना करती है लेकिन मैं जबरदस्ती वहीँ से जता हूँ, वो साड़ी के पल्लू से अपना मुह छिपा लेती है, लेकिन बुड्ढे की नज़र उस पर पड़ जाती है और मैं बुड्ढे को सलाम ठोकता हूँ, बुड्ढा समझ जाता है कि कल रात मेने ही उसका सुतान किया था, कांता मेरे पीछे छुपी रहती है और मैं मौसमी के जूस की ठेली में बाइक रोकता हूँ)
मैं- अंकल 2 गिलास जूस बनाना.
अंकल- बेटा ये पीछे कौन है तुम्हारे साथ?
मैं- ऐसे पूछते हैं भेनचोद किसी की बीवी के बारे में, मेरी बीवी है ये पीछे, तू जूस बना भेन के लौड़े, वरना यहीं मारूँगा.
अंकल- माफ करदे बेटा, गलती हो गयी.
(और कांता और मैं जूस पीते हैं, कांता ने पल्लू से अपना मुह ढका हुआ था जिस वजह से उसका चेहरा दिख नहीं रहा था, जूस पीने के बाद मैं बाइक 80 की स्पीड से चलकर वहां से कांता को लेकर निकल जता हूँ)
कांता- ये क्या पागलपन है बेटा, मुझे फसा दिया तूने, अब बुड्ढा क्या बोलेगा.
मैं- कुछ नहीं बोलेगा आंटी, मैं समझा दूंगा उसे.
कांता- और तू गाली क्यों दे रहा था उन्हें, जो भी हों, मेरे पति है वो.
मैं- तू क्यों घबराती है इतना आंटी, चुपचाप बैठे रह, तुझे घूमाता हूँ मैं.
(मैं उसे बाइक में एक सुनसान जगह लेकर गया)
कांता- यहाँ जंगल में क्यों लाया तू, यहाँ तो कोई भी नहीं है, मुझे वापस मेरी ठेली में छोड़ दे तू बेटा.
मैं- रुक तो आंटी, तू बहुत घबराती है, इतना मत डरा कर.

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